21 तोपों की सलामी क्या होती है और यह क्यों दी जाती है?

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भारतीय महान गायिका लता मंगेशकर का रविवार को मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। 92 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया। तीनों सेनाओं ने लता दीदी को 21 तोपों की सलामी दी। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी राजनीतिक और मनोरंजन उद्योग की हस्तियों ने शिवाजी पार्क में उन्हें श्रद्धांजलि दी।
लेकिन इक्कीस तोपों की सलामी क्यों दी जाती है 21 तोपों की सलामी देने के पीछे क्या राज छुपे हैं

21 तोपों की सलामी क्या होती है और यह क्यों दी जाती है

आज आपको बताते हैं कि यह 21 तोपों की सलामी क्या होती है और यह क्यों दी जाती है
हमारे भारतवर्ष में गणतंत्र दिवस के मौके पर होने वाले कार्यक्रम में इक्कीस तोपों की सलामी का भी कार्यक्रम आयोजित होता है और 21 तोपों की सलामी की खास बात यह होती है कि यह सलामी 52 सेकंड के राष्ट्रगान के दौरान 2.25 सेकंड के अंतराल पर ही दी जाती है
अब हम आपको बताते हैं कि 21 तोपों की सलामी क्यों दी जाती है तो जनाब 21 तोपों की सलामी की शुरुआत 17वीं शताब्दी के ब्रिटिश शासन काल से हुई थी. 17 वी शताब्दी के दौरान नौ सेना के जवान समुंद्र में दुश्मन को शांतिपूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए जहाज में मौजूद हथियारों से हवाई फायर किया करते थे.

इक्कीस तोपों की सलामी कुछ खास लोगों को ही दी जाती है

लेकिन अभी भी ब्रिटिश शासन में 7 तोपों का इस्तेमाल किया जाता है और ऐसा बताया जाता है कि इक्कीस तोपों की सलामी कुछ खास लोगों को ही दी जाती है पहले के समय में तोपों को लोड अनलोड करने के लिए बहुत समय लगता था इसलिए ब्रिटिश सैनिक बंदूकों से फायर करते थे ब्रिटिश सैनिकों द्वारा किए जाने वाला यह प्रयास धीरे-धीरे एक परंपरा के रूप में अपने दुश्मन के प्रति सम्मान दिखाने के लिए किया जाने लगा
उस दौरान ब्रिटिश युद्ध तोपों पर बाइबिल में उल्लेखित 7 अंक का खास महत्व होने के चलते एक स्थान पर 7 हथियारों को एक साथ रखा जाने लगा था इसलिए उस समय शांति को संदेश देने के लिए सात हथियारों में तीन-तीन बार फायर किया जाता था और इसी के साथ उस समय से 21 तोपों की सलामी देना शुरू हो गया

अंतिम संस्कार (Funeral) के दौरान दिया जाता है राजकीय सम्मान 

वहीं भारत की बात करें तो भारत में यह रिवाज ब्रिटिश शासन काल से ही शुरू हुई थी आजादी से पहले यहां मौजूद स्थानीय राजाओं को भी 19 या 17 तोपों की सलामी दी जाने लगी थी.
किसी दिवंगत को राजकीय सम्मान अंतिम संस्कार (Funeral) के दौरान दिया जाता है उस दिन को राष्ट्रीय शोक के तौर पर घोषित कर दिया जाता है. भारत के ध्वज संहिता के अनुसार राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया जाता है. दिवंगत के पार्थिव शरीर को राष्ट्रीय ध्वज के ढक दिया जाता है और बंदूकों की सलामी भी दी जाती है.
लता दीदी से पहले जनरल बिपिन रावत को भी 17 तोपों की सलामी दी गयी थी .

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