नई दिल्ली, 10 मई। एक दुखद खबर, संगीत के क्षेत्र से है, मशहूर संतूर वादक और Padma Vibhushan से सम्मानित पंडित शिव कुमार शर्मा का आज सुबह दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है, वो 84 वर्ष के थे और पिछले काफी वक्त से किडनी की परेशानी से जूझ रहे थे।

13 जनवरी 1938 को जम्मू में जन्मे शिव कुमार शर्मा ने अपने संगीत से संतूर को इंटरनेशनल पहचान दिलाई थी। उनके निधन से संगीत के दुनिया में शोक की लहर दौड़ गई है।

आपको बता दें कि पंडित शिवकुमार शर्मा का जन्म जम्मू में मशहूर गायक उमा दत्त शर्मा के घर हुआ था और उनकी मातृभाषा डोगरी थी। संगीत का माहौल उन्हें बचपन से ही मिला था, मात्र पांच साल की उम्र में ही शिव कुमार शर्मा ने तबला बजाना प्रारंंभ कर दिया था, शिवकुमार शर्मा ने तेरह साल की उम्र में संतूर बजाना शुरू किया था। साल 1955 में उन्होंने पहली बार स्टेज शो किया था।

उनकी पत्नी का नाम मनोरमा शर्मा है, इस शादी से शिव कुमार शर्मा को दो बेटे हैं। उनका बेटा राहुल भी एक संतूर वादक है, शिव कुमार शर्मा ने साल 1996 में अपने बेटे के साथ एक शो किया था जो कि खासा लोकप्रिय हुआ था।

शिवकुमार शर्मा को संतूर को एक लोकप्रिय शास्त्रीय वाद्य यंत्र बनाने का श्रेय दिया जाता है। उन्होंने 1956 में शांताराम की फिल्म ‘झनक झनक पायल बाजे ‘ के एक दृश्य के लिए पहली बार संतूर का प्रयोग किया था। उनका पहला एलबम साल 1960 में आया था। फिर साल 1967 में उन्होंने मशहूर बांसुरी वादक हरिप्रसाद चौरसिया औऱ गिटार वादक बृजभूषण काबरा के साथ एक Call of the Valley नामक एलबम निकाला था, जिसने शास्त्रीय संगीत को एक नई ऊंचाई दी थी। ये एलबम काफी लोकप्रिय हुआ था। इसी के साथ ही उन्होंने फासले (1985), चांदनी (1989), लम्हे (1991), और डर (1993) जैसी सुपरहिट हिंदी फिल्मों में संगीत भी दिया था। चांदनी का सुपर हिट गीत ‘मेरे हाथों में नौ-नौ चूड़ियां हैं’ के संगीतकार शिव-हरि यानी कि शिव कुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया ही थे। ये दोनों यशराज बैनर के फेवरेट संगीतकारों की लिस्ट में शामिल रहे हैं।