श्रीलंका में आर्थिक तंगी के बाद श्रीलंका के लोग दाने-दाने के लिए मोहताज
भारत से मात्र 32 किलोमीटर की दुरी पर बसा और भारत के दक्षिड़ में हिन्द महासागर में लगा हुआ एक दूइप जिसको दुनिया श्री लंका के नाम से जाना जाता है श्री लंका को पहले सीलोन नाम से जाना जाता था १९७८ में इसको लंका नाम दिया और सम्म्मानजनक तोर पर सभी ने इसे श्री लंका नाम दे दिया श्री लंका और भारत का रिश्ता बहुत गहरा है और बहुत पुराना है जब भारत पर अंग्रेजों ने कब्जा किया, तो भला श्रीलंका कैसे बच जाता। सबसे पहले श्रीलंका के तटीय इलाकों को अंग्रेजों ने 1796 में अपने कब्जे में लिया। धीरे-धीरे पूरे kianews.in श्रीलंका पर उनका कब्जा हो गया।भारत 1947 में आजाद हुआ, तो इंग्लैंड को लगा कि इस छोटे से देश श्रीलंका पर कब्जा जमाए रखने में क्या फायदा। इसीलिए भारत छोड़ने के छह महीने के अंदर 4 फरवरी 1948 को श्रीलंका आजाद हो गया।पर भारत की तरह गणतंत्र बनने में उसे 24 साल लगे और 1972 में वह गणतंत्र घोषित हुआ।ये तो थी श्री लंका देश की छोटी सी इतिहासिक जानकारी लेकिन अब बात आज के समय की करते है?
भारत का ये पडोसी मुल्क जो इन दिनों काफी बुरे हालातो से गुजर रहा है श्री लंका में जारी आर्थिक संकट को लेकर श्री लंका के लोग दाने दाने के लिए मोहताज हो गए है भारत के पड़ोसी देश में (sri lanka) अस्पतालों में दवाएं खत्म होने से डॉक्टर्स ने मरीजों का ऑपरेशन रोक दिया। पेट्रोल पंप पर फ्यूल के लिए दो-दो किलोमीटर लंबी लाइनें लग रहीं। खाने की चीजें इतनी महंगी हो गईं कि लोग भूखे सोने को मजबूर हैं। आलम ये है कि पेट्रोल से भी महंगा दूध बिक रहा है।एक कप चाय की कीमत 100 रुपये हो गई है। मिर्च 700 रुपये किलोग्राम बिक रही है। एक किलो आलू के लिए 200 रुपये तक चुकाने पड़ रहे। फ्लूल की कमी का असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। अब कई शहरों में 12 से 15 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है।
श्रीलंका पर कई देशों का कर्ज भी है। यहां जनवरी में विदशी मुद्रा भंडार 70 फीसदी से ज्यादा घटकर 2.36 अरब डॉलर रह गया था, जिसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते ही देश में ज्यादातर जरूरी सामानों दवा, पेट्रोल-डीजल का विदेशों से आयात नहीं हो पा रहा है। बीते दिनों आई रिपोर्ट की मानें तो देश में कुकिंग गैस और बिजली की कमी के चलते करीब 1,000 बेकरी बंद हो चुकी हैं और जो बची हैं उनमें भी उत्पादन ठीक ढंग से नहीं हो पा रहा है।
पिछले साल 30 अगस्त को, श्रीलंका सरकार ने मुद्रा मूल्य में भारी गिरावट के बाद राष्ट्रीय वित्तीय आपातकाल की घोषणा की थी और उसके बाद खाद्य कीमतों में काफी तेज बढ़ोतरी हुई। इस संबंध में बीते दिनों आई एक रिपोर्ट में देश में महंगाई को आंकड़ों के साथ पेश किया गया था। जनवरी में आई इस रिपोर्ट में बताया गया था कि नवंबर 2021 से दिसंबर 2021 के बीच महज एक महीने के भीतर ही श्रीलंका में खाद्य वस्तुओं की महंगाई 15 प्रतिशत बढ़ गई थी।इसके बाद जो हालात बने उसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि देश में एक किलो मिर्च की कीमत 710 रुपये हो गई, एक ही महीने में मिर्च की कीमत में 287 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। यही नहीं बैंगन की कीमत में 51 फीसदी बढ़ी, तो प्याज के दाम 40 फीसदी तक बढ़ गए। एक किलो आलू के लिए 200 रुपये तक चुकाने पड़े।
यही नहीं, एक लीटर पेट्रोल की कीमत 254 रुपए है, जबकि एक लीटर दूध 263 रुपये में बिक रहा है। लोगों को एक ब्रेड का पैकेट भी 0.75 डॉलर (150) रुपये में खरीदना पड़ रहा है। यहीं नहीं एक किलोग्राम चावल और चीनी की कीमत 290 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। मौजूदा समय में एक चाय के लिए लोगों के 100 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
चीन सहित कई देशों के कर्ज तले दबे श्रीलंका का जनवरी में विदशी मुद्रा भंडार 70 फीसदी से ज्यादा घटकर 2.36 अरब डॉलर रह गया था, जिसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते ही देश में ज्यादातर जरूरी सामानों दवा, पेट्रोल-डीजल का विदेशों से आयात नहीं हो पा रहा है।
वहीं दिवालिया होने की कगार पर पहहुंच चुके श्रीलंका के हालात पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने कहा है कि देश की अर्थव्यवस्था के समक्ष चुनौतियां बढ़ रही हैं और सरकारी ऋण काफी उच्च स्तर पर पहुंच गया है। आईएमएफ ने गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे देश की अर्थव्यवस्था में तत्काल सुधारों का आह्वान किया जाये
चीन सहित कई देशों के कर्ज तले दबे श्रीलंका का जनवरी में विदशी मुद्रा भंडार 70 फीसदी से ज्यादा घटकर 2.36 अरब डॉलर रह गया था, जिसमें लगातार गिरावट आती जा रही है। विदेशी मुद्रा की कमी के चलते ही देश में ज्यादातर जरूरी सामानों दवा, पेट्रोल-डीजल का विदेशों से आयात नहीं हो पा रहा है।
श्रीलंका में संकट कितना गहरा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी डॉलर के मुकाबले श्रीलंकाई रुपया सिर्फ मार्च महीने में भी अब तक 45 फीसदी टूट चुका है। एक मार्च से अब तक श्रीलंका की मुद्रा डॉलर की तुलना में टूटकर 292.5 के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ चुकी है। देश के प्रधानमंत्री महिंद्रा राजपक्षे की मानें तो इस साल देश को 10 अरब डॉलर का व्यापारिक घाटा हो सकता है
देश के विदेशी मुद्रा संकट के बीच पेट्रोलियम की कीमतें आसमान छू गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, श्रीलंका की सरकार के पास पेट्रोल और डीजल खरीदने के लिए विदेशी मुद्रा नहीं बची है जिससे ये संकट और भी गहरा गया है। कुछ दिनों पहले श्रीलंका से ऐसी तस्वीरे आईं कि लोग पेट्रोल खरीदने के लिए पेट्रोल पंप पर टूट पड़े हैं और लोगों को नियंत्रित करने के लिए सेना बुलानी पड़ी। हजारों लोग घंटों तक कतार में इंतजार करके तेल खरीद रहे हैं। देश में डॉलर की कमी ने सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया है। देश में फरवरी में महंगाई 17.5 प्रतिशत के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई जो कि पूरे एशिया में सबसे ज्यादा है। बता दें कि देश की अर्थव्यस्था के बर्बादी की कगार पर पहुंचने के लिए एक कारण देश में पर्यटन उद्योग का पतन है। बता दें कि कोरोना महामारी के कारण देश की जीडीपी में अहम योगदान देने वाला श्रीलंका का पर्यटन क्षेत्र पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा था, जो अब तक उबर नहीं सका है। टूरिज्म इंडस्ट्री का देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी में लगभग 10 प्रतिशत का योगदान है।
2019 में कोलंबो में हुए सीरियल बम धमाकों के बाद से पर्यटन उद्योग को झटका लगा था और कोरोना महमारी ने इसे इतना बढ़ा दिया कि इसे उबारना भी मुश्किल हो गया। इसका असर भी सीधे तौर पर श्रीलंका की विदेशी मुद्रा आय पर पड़ा। इसके अलावा सरकारी आंकड़ों के अनुसार, श्रीलंका में एफडीआई में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। बता दें कि यदि किसी देश में एफडीआई घटती है, तो उसके भंडार में विदेशी मुद्रा भी कम हो जाती है। श्रीलंका पर करीब 32 अरब डॉलर का विदेशी कर्ज है। इस तरह श्रीलंका की सरकार के सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ उसे विदेशी कर्ज का पेमेंट करना है तो दूसरी तरफ अपने लोगों को मुश्किल से उबारना है। सरकार के सामने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से आर्थिक मदद लेने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीलंका की सरकार को विदेशी कर्ज को जुलाई तक रीस्ट्रक्चर करना होगा। इसकी वजह यह है कि जुलाई में एक अरब डॉलर का कर्ज लौटाने के लिए सरकार के पास पैसे नहीं हैं। विश्व बैंक की ओर से बीते साल अनुमान जताया गया था कि कोरोना महामारी के शुरू होने के बाद से देश में 500,000 लोग गरीबी के जाल में फंस गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जो परिवार पहले संपन्न माने जाते थे, उनके लिए भी दो जून की रोटी जुटानी मुश्किल पड़ रही है। देश के अधिकांश परिवारों के लिए अपनी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने लाले पड़े हैं। देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिति के बीच यात्रा और पर्यटन क्षेत्र में ही करीब दो लाख से ज्यादा लोगों का रोजगार खत्म हो चुका है और यही हालात दूसरे क्षेत्रों में बने हुए हैं। मुद्रास्फीति का रिकॉर्ड स्तर, खाद्य पदार्थों की कीमतों में उछाल और कोरोना महामारी से पैदा हुई परेशानियों के कारण देश के खजाने सूख रहे हैं। हालात यहां तक खराब हो चुके हैं कि इस देश के इस साल दिवालिया होने की आशंका है। एक पूर्व रिपोर्ट में कहा गया है कि देश को अगले कुछ महीनों में घरेलू और विदेशी ऋणों में अनुमानित 7.3 अरब डॉलर चुकाने की जरूरत है, जबकि उसके पास देश चलाने के लिए भी पैसे नही बचे हैं।
ऐसे में श्रीलंका में राजपक्षे परिवार की नाकामी को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. जनता के बढ़ते आक्रोश के बीच सत्तारूढ़ गठबंधन ने संसद में बहुमत खो दिया है. दरअसल देश में जारी आर्थिक संकट को लेकर जब 41 सांसदों ने सत्ताधारी गठबंधन से बाहर निकलने का ऐलान किया. जिसके बाद सरकार को लेकर बन रही अनिश्चितता की स्थिति खत्म हो गई है.इस बीच श्रीलंका फ्रीडम पार्टी के नेता मैत्रीपाला सिरिसेना ने कहा, ‘हमारी पार्टी लोगों के पक्ष में है, जिसने राजपक्षे के गठबंधन से अपना समर्थन वापस ले लिया’ देश में राजपक्षे परिवार की नाकामी को लेकर प्रदर्शन थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. बदहाल अर्थव्यवस्था ने सबकुछ ठप कर दिया है. खाने पीने से लेकर रोजमर्रा की जरूरी चीजों की किल्लत है. कोलंबो में हालात इस कदर बिगड़े कि स्ट्रीट लाइट तक बंद करनी. इसकी वजह ये है कि बिजली बचाने के लिए श्रीलंका की सरकार ने पूरे हाइवे की लाइट बंद कर दी ताकि आपात स्थिति के लिए कुछ इंतजाम किया जा सके.
देश के राजनीतिक संकट को खत्म करने के लिए श्रीलंका के राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे ने सोमवार को चार मंत्रियों को शपथ दिलाई है. बता दें कि देश में गंभीर आर्थिक और राजनीतिक संकट के बीच कैबिनेट ने सामूहिक रूप से इस्तीफा दे दिया था. वहीं श्रीलंका के विपक्षी दलों ने सर्वदलीय सरकार बनाने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और राष्ट्रपति के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है.
अब देखने बाली बात ये है की श्री लंका की हालत कब तक सुधरते है इन हालतो को सुधारने के लिए भारत ने तुरंत श्रीलंका को एक अरब डॉलर की मदद दी है